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18 August 2017

Learn about Computers (All in one in Hindi)

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कंप्यूटर का परिचय


कंप्यूटर शब्द अंग्रेजी के "Compute" शब्द से बना है, जिसका अर्थ है "गणना", करना होता है इसीलिए इसे गणक या संगणक भी कहा जाता है, इसका अविष्‍कार Calculation करने के लिये हुआ था, पुराने समय में Computer का use केवल Calculation करने के लिये किया जाता था किन्‍तु आजकल इसका use डाक्‍यूमेन्‍ट बनाने, E-mail, listening and viewing audio and video, play games, database preparation के साथ-साथ और कई कामों में किया जा रहा है, जैसे बैकों में, शैक्षणिक संस्‍थानों में, कार्यालयों में, घरों में, दुकानों में, Computer का उपयोग बहुतायत रूप से किया जा रहा है, computer केवल वह काम करता है जो हम उसे करने का कहते हैं यानी केवल वह उन Command को फॉलो करता है जो पहले से computer के अन्‍दर डाले गये होते हैं, उसके अन्‍दर सोचने समझने की क्षमता नहीं होती है, computer को जो व्‍यक्ति चलाता है उसे यूजर कहते हैं, और जो व्‍यक्ति Computer के लिये Program बनाता है उसे Programmer कहा जाता है।Computer मूलत दो भागों में बॅटा होता है- सॉफ्टवेयर- हार्डवेयर कंप्यूटर का इतिहासआज आप कंप्यूटर पर इंटरनेट चलाते हैँ, गेम खेलते है, वीडियो देखते हैं, गाने सुनते हैँ और इसके अलावा ढेर सारे ऑफिस से संबंधित काम करते हैं आज कंप्यूटर का उपयोग दुनिया के हर क्षेत्र मेँ किया जा रहा है चाहे वो शिक्षा जगत हो, फिल्म जगत हो या आपका ऑफिस हो। कोई भी जगह कंप्यूटर के बिना अधूरी है आज आप कंप्यूटर की सहायता से इंटरनेट पर दुनिया के किसी भी शहर की कोई भी जानकारी सेकेण्‍डों मे प्राप्त कर सकते हैँ ये किसी दूसरे देश मेँ बैठे अपने मित्रोँ और रिश्तेदारोँ से इंटरनेट के माध्यम लाइव वीडियो कॉंफ्रेंसिंग कर सकते हैँ यह सब संभव हुआ है कंप्यूटर की वजह से। सोचिए अगर कंप्यूटर ना होता तो आज की दुनिया कैसी दिखाई देती।कंप्यूटर शुरुआत कहाँ से हुई ओर क्यूँ हुई ? क्या वाकई मेँ कंप्यूटर इन सभी कामों को करने के लिये बना था या इसका आविष्कार किसी और वजह से हुआ था आइए जानते हैँ -मानव के लिए गणना करना शुरु से ही कठिन रहा है मनुष्य बिना किसी मशीन के एक सीमित स्तर तक ही गणना या केलकुलेशन कर सकता है ज्यादा बडी कैलकुलेशन करने के लिए मनुष्य को मशीन पर ही निर्भर रहना पड़ता है इसी जरुरत को पूरा करने के लिए मनुष्य ने कंप्यूटर का निर्माण किया, यानी गणना करने के लिए।अबेकसअबेकस पहला ऐसा कंप्यूटर था, जो गणना कर सकता था। अबेकस का निर्माण लगभग 3000 वर्ष पूर्व चीन के वैज्ञानिकोँ ने किया था। एक आयताकार फ्रेम में लोहे की छड़ोँ में लकडी की गोलियाँ लगी रहती थी जिनको ऊपर नीचे करके गणना या केलकुलेशन की जाती थी। यानी यह बिना बिजली के चलने वाला पहला कंप्यूटर था वास्तव मेँ यह काम करने के लिए आपके हाथो पर ही निर्भर था।पास्‍कलाइनअबेकस के बाद निर्माण हुआ पास्‍कलाइन का। इसे गणित के विशेषज्ञ ब्लेज पास्कल ने सन् 1642 मेँ बनाया यह अबेकस से अधिक गति से गणना करता था। ये पहला मैकेनिकल कैलकुलेटर था।डिफरेंज इंजनडिफरेंस इंजन सर चार्ल्स बैबेज द्वारा बनाया ऐसा यंत्र था जो सटीक तरीके से गणनायें कर सकता था, इसका आविष्कार संस 1822 मैँ किया गया था, इसमें प्रोग्राम स्टोरेज के लिए के पंच कार्ड का इस्‍तेमाल किया जाता था। इसके आधार ही आज के कंप्यूटर बनाये जा रहे हैं इसलिए चार्ल्स बैवेज को कंप्यूटर का जनक कहते हैँ।कंप्यूटर की Generationपहली पीढ़ी के कंप्यूटर - First generation computer Timeline - 1942-1955इस पीढी के कंप्यूटर में वैक्यूम ट्यूब (Vacuum Tube) का प्रयोग किया जाता था, जिसकी वजह से इनका आकार बहुत बडा होता था और बिजली खपत भी बहुत अधिक होती थी। यह ट्यूब बहुत ज्यादा गर्मी पैदा करते थे। इन कंम्यूटरों में ऑपरेंटिग सिस्टम नहीं होता था, इसमें चलाने वाले प्रोग्रामों को पंचकार्ड में स्टोर करके रखा जाता था। इसमें डाटा स्टोर करने की क्षमता बहुत सीमित होती थी। इन कंप्यूटरों में मशीनी भाषा (Machine language) का प्रयोग किया जाता था।तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर - Third generation computer Timeline - 1964-1975यहाँ तक आते आते ट्रांजिस्टर की जगह इंटीग्रेटेड सर्किट (Integrated Circuit) यानि आईसी ने ले ली और इस प्रकार कंप्यूटर का आकार बहुत छोटा हो गया, इन कंम्यूटरों की गति माइक्रो सेकंड से नेनो सेकंड तक की थी जो स्केल इंटीग्रेटेड सर्किट के द्वारा संभव हो सका। यह कंम्पयूटर छोटे और सस्ते बनने लगे और साथ ही उपयोग में भी अासान होते थे। इस पीढी में उच्च स्तरीय भाषा पास्कल और बेसिक का विकास हुआ। लेकिन अभी भी बदलाव हो रहा था।चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर - Fourth generation computers Timeline - 1967-1989चिप तथा माइक्रोप्रोसेसर चौथी पीढी के कंप्यूटरों में आने लगे थे, इससे कंप्यूटरों का आकार कम हो गया और क्षमता बढ गयी। चुम्बकीय डिस्क की जगह अर्धचालक मैमोरी (Semiconductor memory) ने ले ली साथ ही उच्च गति वाले नेटवर्क का विकास हुआ जिन्हें आप लैन और वैन के नाम से जानते हैं। ऑपरेटिंग के रूप में यूजर्स का परिचय पहली बार MS DOS से हुआ, साथ ही कुछ समय बाद माइक्रोसॉफ्ट विंडोज भी कंप्यूटरों में आने लगी। जिसकी वजह से मल्टीमीडिया का प्रचलन प्रारम्भ हुआ। इसी समय C भाषा का विकास हुआ, जिससे प्रोग्रामिंग करना सरल हुआ।पांचवीं पीढ़ी के कंप्यूटर - Fifth generation computers Timeline - 1989 से अब तकUltra Large-Scale Integration (ULSI) यूएलएसआई, ऑप्टीकल डिस्क जैसी चीजों का प्रयोग इस पीढी में किया जाने लगा, कम से कम जगह में अधिक डाटा स्टोर किया जाने लगा। जिससे पोर्टेबल पीसी, डेस्कटॉप पीसी, टेबलेट आदि ने इस क्षेञ में क्रांति ला दी। इंटरनेट, ईमेल, WWW का विकास हुआ। आपका परिचय विडोंज के नये रूपों से हुआ, जिसमें विडोंज XP को भुलाया नहीं जा सकता है। विकास अभी भी जारी है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) पर जोर दिया जा रहा है। उदाहरण के लिये विंडोज कोर्टाना को आप देख ही रहे हैं।सॉफ्टवेयर क्‍या होता हैसॉफ्टवेयर Computer का वह Part होता है जिसको हम केवल देख सकते हैं और उस पर कार्य कर सकते हैं, Software का निर्माण Computer पर कार्य करने को Simple बनाने के लिये किया जाता है, आजकल काम के हिसाब से Software का निर्माण किया जाता है, जैसा काम वैसा Software । Software को बडी बडी कंपनियों में यूजर की जरूरत को ध्‍यान में रखकर Software programmers द्वारा तैयार कराती हैं, इसमें से कुछ free में उपलब्‍ध होते है तथा कुछ के लिये चार्ज देना पडता है। जैसे आपको फोटो से सम्‍बन्धित कार्य करना हो तो उसके लिये फोटोशॉप या कोई वीडियो देखना हो तो उसके लिये मीडिया प्‍लेयर का यूज करते है।हार्डवेयर क्‍या होता है हार्डवेयर Computer का Machinery भाग होता है जैसे LCD, की-बोर्ड, माउस, सी.पी.यू., यू.पी.एस. आदि जिनको छूकर देखा जा सकता है। इन Machinery Part के मिलकर computer का बाहरी भाग तैयार होता है तथा Computer इन्‍ही हार्डवेयर भागों से computer की क्षमता का निर्धारण किया जाता है आजकल कुछ Software को Computer में चलाने के लिये निर्धारित Hardware की आवश्‍यकता होती है। यदि Software के अनुसार Computer में हार्डवेयर नहीं है तो Software को Computer में चलाया नहीं जा सकता है।कंप्यूटर की हार्डवेयर संरचनाकम्प्यूटर के निम्‍न महत्वपूर्ण भाग होते है:-- मोनीटर या एल.सी.डी.- की-बोर्ड- माऊस- सी.पी.यू.- यू.पी.एस मोनीटर या एल सी डीइसका प्रोयोग कम्प्यूटर के सभी प्रेाग्राम्स का डिस्‍प्ले दिखाता है। यह एक आउटपुट डिवाइस है। की-बोर्डइसका प्रयोग कम्प्यूटर मे टाइपिंग लिए किया जाता है, यह एक इनपुट डिवाइस है हम केवल की-बोर्ड के माध्यम से भी कम्‍प्‍यूटर को आपरेट कर सकते है। माऊसमाऊस कम्प्यूटर के प्रयोग को सरल बनाता है यह एक तरीके से रिमोट डिवाइस होती है और साथ ही इनपुट डिवाइस होती है। सी. पी. यू. (सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट)यह कम्प्यूटर का महत्वपूर्ण भाग होता है हमारा सारा डाटा सेव रहता है कम्प्यूटर के सभी भाग सी. पी. यू. से जुडे रहते है। सीपीयू के अन्‍दरूनी भागों के बारे में जानें क्लिक करें। यू.पी.एस. (अनिट्रप पावर सप्लार्इ)यह हार्डवेअर या मशीन कम्प्यूटर बिजली जाने पर सीधे बन्द होने से रोकती है जिससे हमारा सारा डाटा सुरक्षित रहता है। यह सारे हार्डवेयर दो भागों में बॅटे रहता है- आउटपुट डिवाइस- इनपुट डिवाइसआउटपुट डिवाइसआउटपुट डिवाइसयह वह हार्डवेअर डिवाइस होती है जिसे हमें कम्प्यूटर से कोर्इ भी डाटा या कोर्इ भी आउटपुट प्राप्त होती है।- मोनीटर- स्पीकर- प्रिन्टर- प्रोजेक्टर- हेडफोनइनपुट डिवाइसइनपुट डिवाइसयह वह हार्डवेअर डिवाइस होती है जिसे हमें कम्प्यूटर से कोर्इ भी डाटा या कमाण्‍ड इनपुट करा सकते हैं।- माऊस- की-बोर्ड- स्केनर- डी.वी.डी.ड्रार्इव- पेनड्रार्इव- कार्डरीडर- माइक्रोफोनकंप्यूटर की कार्य प्रणालीकंप्‍यूटर को ठीक प्रकार से कार्य करने के लिये सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर दोनों की आवश्यकता होती है। अगर सीधी भाषा में कहा जाये तो यह दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। बिना हार्डवेयर सॉफ्टवेयर बेकार है और बिना सॉफ्टवेयर हार्डवेयर बेकार है। मतलब कंप्‍यूटर सॉफ्टवेयर से हार्डवेयर कमांड दी जाती है किसी हार्डवेयर को कैसे कार्य करना है उसकी जानकारी सॉफ्टवेयर के अन्दर पहले से ही डाली गयी होती है। कंप्यूटर के सीपीयू से कई प्रकार के हार्डवेयर जुडे रहते हैं, इन सब के बीच तालमेल बनाकर कंप्यूटर को ठीक प्रकार से चलाने का काम करता है सिस्टम सॉफ्टवेयर यानि ऑपरेटिंग सिस्टम।कंप्‍यूटर के कार्यप्रणाली की प्रक्रिया एक चरणबद्ध तरीके से होती है -इनपुट (Input)=> प्रोसेसिंग (Processing)=> आउटपुट (Output)- इनपुट के लिये आप की-बोर्ड, माउस इत्‍यादि इनपुट डिवाइस का प्रयोग करते हैं साथ ही कंप्‍यूटर को सॉफ्टवेयर के माध्‍यम से कंमाड या निर्देश देते हैं या डाटा एंटर करते हैं।- यह इस प्रक्रिया का दूसरा भाग है इसमें आपके द्वारा दी गयी कंमाड या डाटा को प्रोसेसर द्वारा सॉफ्टवेयर में उपलब्‍ध जानकारी और निर्देशों के अनुसार प्रोसेस कराया जाता है।- तीसरा और अंतिम भाग आउटपुट इसमें आपके द्वारा दी गयी कंमाड के आधार पर प्रोसेस की गयी जानकारी का आउटपुट कंप्‍यूटर द्वारा आपको दिया जाता है जो आपको आउटपुट डिवाइस द्वारा प्राप्‍त हो जाता है।सीपीयू के अन्‍दरूनी भागपरिचय सीपीयू कम्‍प्‍यूटर का मुख्‍य भाग होता है, इसी प्रकार सी.पी.यू. भी कई भागों में बॅटा होता है या वह भी कई हार्डवेयरों को जोडकर बनाया जाता है, इन्‍ही हार्डवेयर भागों की गुणवत्‍ता और क्षमता पर सी.पी.यू. की कार्यक्षमता निर्भर करती है तो आईये जाने सी.पी.यू. के भागों के बारें मेंहार्ड डिस्क यह वह भाग है जिसमें कम्प्यूटर के सभी प्रोग्राम और डाटा सुरक्षित रहते है। हार्ड डिस्क की मेमोरी स्थायी होती है, इसीलिए कम्प्यूटर को बंद करने पर भी इसमें सुरक्षित प्रोग्राम और डाटा समाप्‍त नहीं होता है। आज से 10 वर्ष पहले हार्डडिस्‍क की स्‍टोरेज क्षमता गीगाबाइट/जी.बी. मेगाबाइट या एम.बी. तक सीमित रहती थी किन्‍तु आजकल हार्ड डिस्क की स्‍टोरेज क्षमता को टेराबाइट या टीबी में मापा जाता है किन्तु आजकल 500 जी.बी. तथा 1 TB या 1000 GB के क्षमतायुक्त पीसी लोकप्रिय हो गए है। हार्ड डिस्क की क्षमता जितनी अधिक होगी उतना ही ज्‍यादा डाटा स्‍टोर किया जा सकता है।मदर बोर्डमदर बोर्ड फाइबर ग्लास का बना एक समतल प्लैटफार्म होता है, जो कम्‍प्‍यूटर के सभी हार्डवेयरों को जैसे की बोर्ड, माउस, एल.सी.डी., प्रिन्‍टर आदि को एक साथ जोडें रखता है। मदरबोर्ड से ही प्रोसेसर, हार्डडिस्‍क, रैम भी जुडी रहती है तथा यू.एस.बी., या पेनडाइव लगाने के लिये के भी यू.एस.बी. पाइन्‍ट मदरबोर्ड बोर्ड में दिये गये होते हैं। साथ ही मदरबोर्ड से ही हमें ग्राफिक, तथा साउण्‍ड का आनन्‍द भी मिलता है।सेन्ट्रल प्रासेसिग यूनिट (प्रोसेसर) यह कम्प्यूटर का सबसे अधिक महत्वपूर्ण भाग है। इसमें एक माक्रोप्रोसर चिप रहता है जो कम्प्यूटर के लिए सोचने के सभी काम करता है और यूजर के आदेशेा तथा निर्देशों के अनुसार प्रोग्राम का संचालन करता है। एक तरह से यह कम्‍प्‍यूटर का दिमाग ही होता है। इसी वजह से यह काफी गरम भी होता है और इसको ठंडा रखने के लिेये इसके साथ एक बडा सा फैन भी लगाया जाता है जिसे सी.पी.यू. फैन कहते हैं। आजकल प्रोसेसर पिन लैस आते हैं लेकिन आज से 5 साल पहले पिन वाले प्रोसेसर आते थे। इसनें सबसे प्रचलित पैन्‍टीयम 4 प्रोसेसर रहें हैं। आज के समय में इन्‍टेल कम्‍पनी के डयूलकोर और आई.3 या आई.7 प्रोसेसर काफी प्रचलित हैं। इन प्रोसेसरों से कम्‍प्‍यूटर की क्षमता काफी बढ जाती है।डी.वी.डी. राइटर यह वह भाग है जो डी.वी.डी.-राइटर डिस्क में संचित डाटा को पढता है तथा डी.वी.डी. को राइट भी करता है जब तक डी.वी.डी राइटर नहीं आया था तक डी.वी.डी रोम चलते थे और उससे पहले सी.डी. राइटर या सी.डी. रोम होते थे और उससे भी पहले फ्लोपी डिस्क ड्राइव होती थी जिसमें केवल 3;4 एम.बी. डाटा ही स्‍टोर किया जा सकता था। आजकल ब्‍लूरे डिस्‍क क भी अविष्‍कार हो चुका है जिसमें लगभग 40 जी.बी. तक डाटा स्‍टोर किया जा सकता है। इसके लिये कम्‍प्‍यूटर में ब्‍लूरे राइटर को लगाना आवश्‍यक होगा।रैमरैम की फुलफार्म रैन्‍डम एक्सिस मैमरी होती है, रैम कम्‍प्‍यूटर को वर्किग स्‍पेस प्रदान करती यह एक प्रकार की अस्‍थाई मैमोरी होती है, इसमें कोई भी डाटा स्‍टोर नहीं होता है। जब हम कोई एप्‍लीकेशन कम्‍प्‍यूटर में चलाते हैं, तो वह चलते समय रैम का प्रयोग करती है। कम्‍प्‍यूटर में कम रैम होने की वजह से कभी कभी हैंग होने की समस्‍या आती है तथा कुछ ऐप्‍लीकेशन को पर्याप्‍त रैम नहीं मिलती है तो वह कम्‍प्‍यूटर में नहीं चलते है। रैम कई प्रकार की आती है, जैसे DDR, DDR1, DDR2 तथा DDR3 आजकल के प्रचलन में डी.डी.आर.3 रैम है। रैम के बीच के कट को देखकर रैमों को पहचाना जा सकता है।पावर सप्लार्इकम्प्यूटर के सभी भागों को उनकी क्षमता के अनुसार पावर प्रदान करने का कार्य पावर सप्‍लाई करती है। इसको भी ठंडा रखने के लिये इसमें फैन लगा होता है। इसमें से मदरबोर्ड, हार्डडिस्‍क, डी.वी.डी.राइटर को उचित सप्‍लाई देने हेतु अलग अलग प्रकार के वायर दे रखे होते है। इसका मेन स्‍वीच सी.पी.यू. के पीछे दिया होता है जहॉ पावर केबिल के माध्‍यम से कम्‍प्‍यूटर को पावर दी जाती है।मॉनिटर मॉनिटर का काम कंप्यूटर के सारे काम को Screen पर दिखाना होता है। यह दो तरह के होते है। CRT और LCD .की-बोर्ड माउसKeyboard पर बहुत सारे बटन होते है, जिनको दबाकर कंप्यूटर में instruction दिया जाता हैहै, जिससे कंप्यूटर काम करता है। माउस ऑप्टिकल डिवाइस होता है। इस पर दो buttons लगे होते है। मॉनिटर के स्क्रीन पर कर्सर के द्वारा कंप्यूटर में काम किया जाता है।कंप्यूटर असेम्ब्लिंग क्या हैकंप्यूटर कई भागो से मिलकर बनता है। जिसमें Motherboard से लेकर Hard disk, floppy Disk Drive, Cd-Rom Drive इत्यादि शामिल है। इन सभी Computer Parts को ठीक तरह से Assemble करके एक system का रूप देना Computer Assembling कहलाता है।कंप्यूटर असेम्बल करने के लिए दो तरह के पार्ट्स को प्रयोग किया जाता है।1. अनिवार्य पार्ट्स Compulsory Computer Partsयह ऐसे पार्ट्स होते है जिनके बगैर कंप्यूटर को असेम्बल नहीं किया जा सकता है।- Motherboard- Processor- Ram- Hard Disc Drive- Dvd Rom or CD Rom- SMPS (Switch Mode Power Supply)- Monitor (CRT/LCD/TFT/LED)- Keyboard/Mouse 2. वैकल्पिक पार्ट्स Optional Computer Partsऐसे पार्ट्स जिनके बिना भी कंप्यूटर को असेम्बल किया जा सकता है वैकल्पिक पार्ट्स होते है। जैसे- Printer, Scanner- Pen Drive- Speaker- Projector- UPS (compulsory)- Web Cameraकैसे करें कंप्यूटर असेम्बलिंगComputer assembly एक ऐसा subject है जो ज्ञान बढाने के साथ-साथ रोजगार देने वाला भी है, अगर आपको Computer assemble करना आता है, तो आप अपना छोटा सा रोजगार घर से शुरू कर सकते हैं और कमाई कर सकते हैं, हॉ इसके लिये computer में रूचि और Computer software और Hardware का थोडा ज्ञान भी होना अावश्‍यक है, अगर आपको Computer software और Hardware के बारे में Information है तो आप घर बैठे ही अपना Budget PC बना सकते हैं या रोजगार हेतु भी काम शुरू कर सकते हैं आइये जानते हैं -- सबसे पहले आप CPU के लिये निम्‍न Hardware खरीदने होगें Motherboard, Processor, RAM, Cabinet, Hard Drive, Optical Drive, Keyboard, Mouse, Monitor.- सबसे पहले Motherboard में Processor को Fit कीजिये।- अब Processor पर CPU fan को लगाईये।- इसके बाद Motherboard में RAM को Fit कीजिये।- अब Cabinet में Power Supply को Fit कीजिये।- साथ Motherboard के साथ आई back plate को भी Cabinet में लगाईये।- Motherboard को Cabinet में screwdriver की Help से Fit कर दीजिये।- इसके बाद Hard Disk Drive और Optical CD/DVD Drive भी screwdriver की Help से Fit कर दीजिये।- अब Power Supply से Motherboard, Hard Disk Drive और Optical CD/DVD Drive को Connect कर दीजिये।- इसके बाद Motherboard से SATA connectors द्वारा Hard Disk Drive और Optical CD/DVD Drive को Connect कर दीजिये।- Cabinet में दिये गये Power, Reset, Power LED और HDD LED switches को Motherboard से Connect कर दीजिये।- आपका CPU तैयार हैं, इससे Keyboard, Mouse अौर Monitor.को Connect कर दीजिये।- अब जो भी operating systems install करना है install कर लीजिये। आपका अपना Personal Desktop Computer तैयार है।ऐसे करें खुद ही अपना कंप्यूटर रिपेयरबंद होने पर पहले यह करें यदि आपका सिस्‍टम चलते-चलते बंद हो गया है, तो आप पहले उसे रिस्‍टोर कर सकते हैं। रिस्‍टोर का ऑप्‍शन आपको स्‍टार्ट मेनू में मिलेगा। इसे आप सिस्‍टम रिस्‍टोर के नाम से सर्च कर सकते हैं। यहां आपको एक विंडो दिखाई देगी, जिसमें आपको सिस्‍टम रिस्‍टोर के ऑप्‍शन मिलेंगे। यहां आपको रिस्‍टोर ऑप्‍शन को सिलेक्‍ट करना है। इसे करने के बाद आपका पीसी रिस्‍टार्ट होगा और उसके बाद विंडो की सारी फाइलें रिस्‍टोर हो जाएंगी। खास बात यह है कि इसमें आपके डेटा को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। इस ऑप्‍शन का प्रयोग आप विंडो विस्‍टा, विंडो एक्‍सपी, विंडो 7-8-10 जैसे ऑपरेटिंग सिस्‍टम में कर सकते हैं।विंडो 8-10 में नया ऑप्‍शन यदि आप विंडो ऑपरेटिंग सिस्‍टम का वर्जन 8-10 यूज कर रहे हैं, तो आपको सिस्‍टम रिस्‍टोर की बजाय रिकवरी का ऑप्‍शन मिलेगा। यहां जाकर आप विंडो रिकवर कर सकते हैं। इसमें रिफ्रेश योर पीसी नाम का ऑप्‍शन ओपन होगा, जिसे आप क्लिक कर सिस्‍टम को रिपेयर कर सकते हैं।यदि सिस्‍टम स्‍टार्ट न हों तो यह करें यदि आपने उपरोक्‍त दोनों ऑप्‍शन्‍स का प्रयोग कर लिया है, और ऐसे में आपका पीसी स्‍टार्ट नहीं हो रहा है, तो इसका मतलब है कि आपके विंडो में कोई प्रॉब्‍लम है। इसके लिए आप विंडो की सी‍डी लगाकर उसे रिपयेर कर सकते हैं। रिपेयर ऑप्‍शन में जाने के बाद आपको सिस्‍टम रिकवरी ऑप्‍शन मिलेगा, जहां कमांड फॉलो करके विंडो रिपेयर कर सकते हैं।पीसी रिकवरी टूल का प्रयोग यदि आप उपरोक्‍त विकल्‍पों से भी सिस्‍टम रिपेयर नहीं कर पा रहे हैं, तो आप रिकवरी टूल की सीडी का भी प्रयोग कर सकते हैं। इसके लिए चाहे तो आप इसे ऑनलाइन डाउनलोड कर सकते हैं या फिर खरीद सकते हैं। इसका प्रयोग भी विंडो सीडी की तरह ही होता है।कंप्यूटर हैंगिंग प्रॉब्लम कैसे सॉल्व करेकंप्यूटर का हेंग होना - कंप्यूटर में बिना मतलब के एप्लीकेशन और सॉफ्टवेयर का इनस्टॉल करना।- बहुत से लोग अपने कंप्यूटर या लैपटॉप में ऐसे सॉफ्टवेयर या एप्लीकेशन को इनस्टॉल कर लेते है। जिनकी उन्हें जरुरत भी नहीं होती है। यह सॉफ्टवेयर कंप्यूटर में बैक ग्राऊँड में रन करते रहते है। और रैम मेमोरी का उपयोग करते है। इसके कारण कंप्यूटर की स्पीड स्लो हो जाती है।- ऐसे सॉफ्टवेयर जो काम के नहीं है। उनको uninstall कर दे।वायरस - VIRUS कंप्यूटर में वायरस होने पर भी कंप्यूटर स्लो व हैंग होने लगते है। इसके लिए किसी अच्छे एंटीवायरस से कंप्यूटर को स्कैन करे।रैम या मेमोरीरैम में यदि कोई मेमोरी बैंक ख़राब है तो भी कंप्यूटर हैंग या हैंग हो कर रीस्टार्ट होता है। इसके लिए रैम को बदले।हार्ड डिस्क ड्राइव या स्टोरेज डिवाइसयदि हार्ड डिस्क ड्राइव में Bad Sector होंगे तो भी कंप्यूटर हैंग होता है। इसके लिए हार्ड डिस्क के Bad Sector को स्कैन करे या बदले।पावर सप्लाईयदि पावर सप्लाई के सही वाल्ट न देने या एसएमपीएस के सही काम न करने पर भी कंप्यूटर हैंग होते है। इसके लिए एसएमपीएस को रिपेयर या बदले।सीपीयू ओवरहीटयदि मदरबोर्ड में प्रोसेसर Overheat हो रहा है। तो भी कंप्यूटर हैंग होगा। इसके लिए सीपीयू फैन को चेक करे या सीपीयू को बदल कर देखे।मदरबोर्डमदरबोर्ड के ख़राब होने पर भी कंप्यूटर हैंग होता है। इसके लिए मदरबोर्ड को चैक करे या बदल कर देखे।लैपटॉप बूट अप या टर्न ऑन या स्टार्ट नहीं हो रहा है कैसे करें ठीकलैपटॉप स्टार्ट न होने के कारण अगर आपका कंप्यूटर स्टार्ट या टर्न ऑन नहीं हो रहा तो परेशान न हो। आपको इसे ठीक करने के लिए किसी के पास जाने की जरुरत नहीं है। आप इस परेशानी को खुद भी हल कर सकते है। यहाँ आपको इसी परेशानी से निकलने के तरीके दिए गए है। आप इन कुछ तरीकों को अपनाकर अपने कंप्यूटर के स्टार्ट न होने की समस्या को खुद ही सुलझा सकते है। तो आइए जानते है ऐसे ही कुछ तरीकों को जिनसे आप अपने कंप्यूटर को ठीक कर सकते है।कंप्यूटर टर्न ऑन न होने की समस्या के समाधान- सबसे पहले अपने कंप्यूटर टर्न ऑन करने की कोसिस करते रहे। अगर बार कोशिश करने पर भी यह ऑन नहीं हो रहा तो आगे के तरीकों को अपनाए।- अपने कंप्यूटर की बैटरी को चेक करें। अगर यह चार्ज नहीं है तो पहले चार्ज करें फिर अपने कंप्यूटर को स्टार्ट करने की कोशिश करें।- अपने कंप्यूटर या लैपटॉप के चार्जर का ही इस्तेमाल करें। अगर आपको कंप्यूटर के ऊपर कोई भी इंडिकेटर नहीं दिख रहा तो आप अपने लैपटॉप का चार्जर चेंज करे।- फ्यूज को चेक करें हो सकता है ये आपके लैपटॉप के लिए ठीक न हो। अगर आपको प्लग में कोई फ्यूज दिखता है तो उसे पेचकस से खोल कर दूसरा लगा दें।- अगर आपके पास एक दूसरा केबल है तो आप उससे चेक कर सकते हो कि कोई फ्यूज है या नहीं।- हो सकता है आपका कंप्यूटर ज्यादा चार्ज हो गया हो। अगर कंप्यूटर ज्यादा चार्ज हो गया है तो कंप्यूटर को थोड़े देर बाद टर्न ऑन करें।- अपने कंप्यूटर की पावर केबल को चेक करें क्या पता वह पावर सप्लाई न कर रही हो या वो प्लग से ढीली हो गई हो।- अपने लैपटॉप की बैटरी को चेक करें। लैपटॉप को हम तब तक बिना बैटरी के भी चला सकते है जब तक उसमे कोई पावर सोर्स जुड़ा हो। अगर आपका लैपटॉप बिना बैटरी के टर्न ऑन हो रहा है तो इसका मतलब है कि आपकी बैटरी में प्रॉब्लम है। बैटरी को चेंज करें।- यूएसबी ड्राइव और मेमोरी कार्ड को भी रिमूव करें। हो सकता है कि यूएसबी ड्राइव और मेमोरी कार्ड में कोई प्रॉब्लम हो जिसकी वजह से लैपटॉप स्टार्ट न हो रहा हो।- लैपटॉप को फैन को साफ़ करें। लैपटॉप में एक फैन लगा होता है जो कि लैपटॉप को ओवरहीट होने से बचाता है। इसलिए लैपटॉप के फैन को छोटे ब्रश से साफ़ करे।- अपने लैपटॉप की रैम को भी चेक करें। आपकी रैम में भी कुछ प्रॉब्लम हो सकती है।ये कुछ तरीके आपको अपने लैपटॉप की प्रॉब्लम को सुलझाने में मदद करेंगे।कंप्यूटर या लैपटॉप अपने आप अचानक बंद हो जाता है क्या करें- कुछ एप ऐसे होते है जो लैपटॉप को सपोर्ट नहीं करते। उन एप को ढूंढिए और उन्हें अनइन्सटॉल कर दीजिये।- कई बार आप अपने लैपटॉप में इतना काम करते हो कि वह ओवरहीट हो जाता है जिसके कारण डिवाइस बंद हो जाता है। वेसे तो यह आपके लैपटॉप के लिए अच्छा है लेकिन इस समस्या से बचने के लिए कूलिंग किट का इस्तेमाल कर सकते है।- लैपटॉप के अचानक बंद हो जाने की समस्या का एक कारण हार्डवेयर भी हो सकता है। यदि आपके लैपटॉप का कोई हार्डवेयर ख़राब है तो किसी हार्डवेयर स्पेशलिस्ट के पास जाए और अपना हार्डवेयर चेक करवा लें।- किसी भी डिवाइस के अचानक बंद हो जाने का एक कारण वायरस भी होता है। इसलिए अपने डिवाइस में वायरस से बचने के लिए एंटी वायरस का इस्तेमाल करें।- कभी-कभी ऑपरेटिंग सिस्टम के करप्ट हो जाने पर लैपटॉप या कंप्यूटर अपने आप बंद हो जाता है। इसलिए अपने लैपटॉप में या तो नयी ऑपरेटिंग सिस्टम को अपडेट करें या एक नार्मल ऑपरेटिंग सिस्टम इनस्टॉल करें।Agar aapko is post ko samajhne me koi pareshani ho rahi ho to is video ko dekhe aur like aur subscribe jaroor karein.Dhanyawad---\[youtube https://www.youtube.com/watch?v=MBGPtOoAgAA&w=560&h=315]


 
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